बैगा

ऱीति रिवाज कर बारे म..

ऱीति रिवाज कर बारे म

 

 

करमा: बैगा करमा नाचा कातिक कर मेहना जोनले दसराहा कथैं, सुरु होथै। डौक़ी डौका दुनो मिलके नाचथैं। अक दुईझन मांदर बाजा बजाथैं अउर नाचथै। उन तीरनीपेहरथै, फेटा बांधथैं, कोल्ग़ी खोचथैं, छीट ओडथै अउर गोला बनायके नाचथै। डौक़ी डौका खमसा नाचथै।

बिहाव:  बैगा समाज म बिहाव ले बडे खुसी ले करथैं। इंखर बिहाव अधिकतर बैसाख, जैठ माह म होथैं। लड़कावारे लड़क़ी ले देखेले जाथै अउर पसंद आथै तो बिहाव कर तिआऱी करथै। बैगा समाज बिहाव कर बेरा म रदा नेंग करथैं जसे लड़कावारे मंद लैजथै, पानी भरथैं, माटी खनथैं, मंढा काटेले जाथै आदि। इंखर बिहाव ले ‘दोसी डोकरा’ करवाथै। बिहाव कर बेरा म ददरिया  अउर बिरहा गाथैं अउर नाचथैं। 

गोदना:

गोदना बैगा समाज कर अक खास पेहचान आय। गोदना ले सिरिप डौक़ी गोदवाथैं। अउर जोन गोदना गोदथै तोनले ‘ओझनिन’ कथैं। 

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