हमर समाज
इतिहास
भारत म 74 जनजाती आहय जोनले आदिम जनजातीय समूह (Primitive Tribal Groups – PTG) कहे जाथै। मध्य प्रदेश में कुल 43 जनजातियाँ आहय, अउर इन 43 म 03 जनजाती ले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) कर रूप में चिन्हित करे गैहे। इन 03 जनजाती आंय- बैगा, भारिया अउर सहरिया।
बैगा जनजाती मुख्यत: डोंगर लिघ्घा रथैं और इन प्रकृति कर संग म सामंजस्य बनायके अपन जिनग़ी ले ज़ीथैं। पर समय कर संग म डोंगर कटाई अउर विकास कर काम कर कारन बैगा समाज कर आदमीन साहर लिघ्घा जायले मजबूर हो गैहैं। बैगा जनजाती अधिकतर मध्य प्रदेस कर बालाघाट, मंडला, डिंडौऱी, शहडोल, अनूपपूर और छत्तीसगढ़ कर कबीरधाम, पेंड्रा, मुंगेली जिला म रथैं। इंखर जनसंख्या लगभग 2.5 लाख आहय।
बैगा भासा या बैगानी
वेरियर एल्विन कर मुताबिक, बैगा समाज अपन जुन्ना ऑस्ट्रो-एशियाटिक भासा कर सफ्फो चिन्हा ले बिसरडैहें। बैगा समाज अपन खुद कर भासा ले छोन्ड़ देईन अउर मिलेहेर छत्तीसगढ़ी बोली ले अपना लेईन। आज बैगा भासा या बैगानी ले छत्तीसगढ़ी बोली के बिगड़े रूप माने जथै, पर अक समय म असे माने जावै कि बैगा भासा या बैगानी खुद अक अलग भासा राहय अउर एले गुठियानवारे रदाझन राहंय।