बैगा

हमरे बारे म..

हमर समाज

इतिहास

भारत म 74 जनजाती आहय जोनले आदिम जनजातीय समूह (Primitive Tribal Groups – PTG) कहे जाथै। मध्य प्रदेश में कुल 43  जनजातियाँ आहय, अउर इन 43 म 03 जनजाती ले  विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) कर रूप में चिन्हित करे गैहे। इन 03 जनजाती आंय- बैगा, भारिया अउर सहरिया। 

बैगा जनजाती मुख्यत: डोंगर लिघ्घा रथैं और इन प्रकृति कर संग म सामंजस्य बनायके अपन जिनग़ी ले ज़ीथैं। पर समय कर संग म डोंगर कटाई अउर विकास कर काम कर कारन बैगा समाज कर आदमीन साहर लिघ्घा जायले मजबूर हो गैहैं। बैगा जनजाती अधिकतर मध्य प्रदेस कर बालाघाट, मंडला, डिंडौऱी, शहडोल, अनूपपूर और छत्तीसगढ़ कर कबीरधाम, पेंड्रा, मुंगेली जिला म रथैं। इंखर जनसंख्या लगभग 2.5 लाख आहय।

 

बैगा

समाजिक जिनग़ी

हमर समाज कर पारंपरिक पहचान अतका अलग आहय कि इन के भारत कर दूसर जनजाति ले अलग दिखथे।

  1. बैगा खेती (बोआर)

बैगा जनजाति के खेती पद्धति ले बोआर कथैं। पर आजकाल बोआर नै बोवैं। ये अक किसम के किंदर किंदरके खेती करेके तऱीका राहय, जोन जादा करके टिकरा उतार म करे जाथै। बोआर खेती म झाड़ी अऊ पेड़ के डारा डहुरा ले काट के उतार  म सुखवा देथैं। ओखर बाद एले जड़ा देथै अउर उंहा राखड बन जथै। अउर बरसाईत आयके अकाध हफ्ता पेहली ओ राखड म बीजा ले बो देथै। पर आजकाल बोआर नै बोवै पर परहा लगाथैं।

2. दवाई अउर जड़ी बूटी कर ग्यान

बैगा आदमीन ले दवाई के गजब ग्यान रथै। उन पेड़-पौधा के अलग-अलग भाग ले सफ्फो किसम के रोग ले जगडेके लाइक जड़ी-बूटी बनाथैं।

3. गोदना परम्परा

बैगा डौक़ी कर लाइक गोदना एक  जरूरी ऱीवाज आय। उन अपन ज़ीउ कर अलग-अलग अंग मं गोदना गुदवा के सिरजाथैं।

4. मौत कर बाद कर मान्‍यता

बैगा समाज मानथैं कि मौत कर बाद म आदमी तीन बाटा हो जाथै।
पेहली (जीव) भगवान छो लवट जथै, जोन मैकल टिकरा के पूरब धरती मं रथें।
दूसर (छांय) मरेहेर आदमी के घर म आनथैं अऊ घर कर चूल्हा कर पाछू रथै।
तीसर (भूत) आदमी के बुरा हिस्सा माने जथै। 

5. महु पीना

बैगा समाज म महु के मंद बहुत पसंद करे जाथे। एले डौक़ी अउर डौका दुनो पीथै।

बैगा भासा या बैगानी

वेरियर एल्विन कर मुताबिक, बैगा समाज अपन जुन्ना ऑस्ट्रो-एशियाटिक भासा कर सफ्फो चिन्‍हा ले बिसरडैहें। बैगा समाज अपन खुद कर भासा ले छोन्ड़‍ देईन अउर मिलेहेर छत्तीसगढ़ी बोली ले अपना लेईन। आज बैगा भासा या बैगानी ले छत्तीसगढ़ी बोली के बिगड़े रूप माने जथै, पर अक समय म असे माने जावै कि बैगा भासा या बैगानी खुद अक अलग भासा राहय अउर एले गुठियानवारे रदाझन राहंय।

नक्सा
टीम

हमर टीम

हमर टीम म कुछ आदमीन आहय, जोन बैगा समाज कर भासा, संस्कृति अऊ परंपरा ला बचाय अऊ आगु बडहाय कर लाइक मिलके काम करत हें। हमर टीम म समाज कर कुछ आदमीन आहय, कुछ डोकरा आहय अउर कुछ जवान घला आहंय।

हम सफ्फोझन मिलके ए कोशिश करथन कि ए वेबसाइट बैगा समाज कर लाइक उपयोगी बनै अउर छवा अउर जवान ले अपन समाज संग जोडैं।

हमर इंहा कर जानकाऱी खुद एखट्टे करथन पर कभु कभु हम कोही दुसर कर पुस्तक ले घला लेहन। हम आस्रा करथन हमर ए कोसिस बैगा समाज ए जोडे  मदत करही।

गोल

हमर उद्देश्य

बैगा समाज कर भासा, संस्कृति अऊ परंपरा ले बचाना अउर आगु बडहाना हमर  उद्देश्य आय। बैगा भासा अक बोली आय अउर आजकाल आदमीन अपन भासा ले कम गुठियाथैं। अउर जवान तो अपन भासा ले कम जानथैं। एखरसेति हमले सही लागिस कि हम अक वेबसाइट बनान जोन म हम हमर भासा अउर ऱीति रिवाज कर जानकाऱी ले अक्के जाघा म एखट्टे करन।

ए वेबसाइट ले हमले:

  • बैगा भासा सीखेले अउर समझे म मदत मिलही।
  • बैगा समाज कर तिहार, रीति-रिवाज अऊ किस्सा बाटे जही।
  • छवा अऊ जवान ले  संस्कृति से जोड़े के काम होही।
  • बैगा समाज ले जुड़े जानकारी अक्केच जाघा म मिलही।

ए वेबसाइट बैगा समाज के चिनहाऱी ले डिजिटल दुनिया म आगु लाए के अक नान अस कोसिस आय।

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हमर मिसन

हमर मिशन बैगा समाज कर भासा, संस्कृति अउर परंपरा ले बचायले, मजबूत बनायले अउर डिजिटल माध्यम ले आगु बडहायके आय, कि आन वारे हमर पीढ़ी, अपन पहचान ऊपर गर्व कर सकैं अउर ओ पहचान संग जुड़े राहंय।

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हमर लक्छ

हमर लक्छ आय कि ए वेबसाइट बैगा समाज के पहचान ले मान-सम्मान दिलावै अउर समाज कर ग्यान ले पुरो दुनिया  तक पहुँचाए के अक मजबूत डिजिटल मंच बनैं।

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