नागा बैगा नागा बैगीन

बैगा कर जिनग़ी

इलाका: बैगा समाज कर आदमीन जादा डोंगर कर आखा पाखा रथैं। बैगा समाज गोंड समाज कर कम रथैं उन अलग टोला म रथैं।

घर: बैगा कर घर माी कर रथै अउर उन खुद अपन घर ले बनाथैं। पेहली मुंड भर माटी उठथै अउर मयाल लगाथै फेर जरासीन उठाके सीवार ठोकथैं। उन फेर चैली ठोकथै अउर ओखर बाद म खपरा छाथै अउर घर कर छबाई करथैं। उन अंगन अंगन ले रुंधथै। उन अधिकतर 2 या 3 खोली कर घर बनाथै। कोही कोही तो अक खोली कर घर घला बनाथैं।  

कपड़ा:  बैगा समाज कर डौका बंड़ी, धोती, फेटा, जाकिट पेहरथैं। अउर डौक़ी फरिया, पोल्का आदि पेहरथैं। अधिकतर डौक़ी गोदना गोदाय रथैं। अउर छवा चड्डा, बंड़ी पेहरथैं।

जेवर: बैगा डौक़ी पैर पट्टी, करधन, चूड़ि, बाज़ूबंद, सूतिया, छुटा, खिनवा, किलिप, घुरघुली आदि चीज ले पेहरथै अउर खुदले सिरजाथैं।

अर्थव्यवस्था: बैगा समाज कर आदमीन मेहनत करनवारे होथैं। इन अधिकतर डोंगर लिघ्घा रथैं एखरसेति इंखर कमाई डोंगर ले जादा होथै। पेहली कर बैगा आदमीन बोआर खेती करके कोदो, कुटक़ी बोवैं। अउर इन चीज बडे आदमीन जादा बोवैं। पर गऱीब आदमीन डोंगर कर साग खावैं। पर आजकाल कर बैगा धान घला कमा लेथैं। तबले घला बैगा समाज डोंगरेच कर साग जादा खाथैं अउर डोंगर कर चीज ले बेच के पैसा कमाथैं। जसे:-

  1. पिहऱी
  2. कऱील
  3. पुटपुड़ा
  4. बांस
  5. लकड़ी
  6. चार
  7. लाख
  8. कोसुम गोटी आदि 

मंड़ई: मंड़ई बैगा कर लाइक तिहार जसे होथै। घर कर सफ्फोझन मंड़ई कर दिन म जमके खुस रथैं। मंड़ई कातिक म सुरु होथै तोन माह तक चलथै। बैगा समाज देवाड़ी तिहार के दिन डांग बांधथै अउर ओ डांग ले मंड़ई रथै तो ओले साल भर म अक बार नचायले लेजथैं। 

समान: बैगा समाज अपन रोज दिन कर काम ले करेके लाइक रदा चीज कर उपयोग करथैं। बैगा समाज कर अपन पारम्परिक चीज आहय पर आजकाल बैगा समाज कर लिघ्घा इन चीज देखेले नै मिलै। कुछ चीज कर नांव हई आय-

  1.  कुमनी: मछड़ी बझायके लाइक
  2. कांवड़- पानी डोहारे खा लाइक
  3. चोल्ग़ी- महु बीने खा लाइक
  4. मंढ़ा - पैरा टांगे खा लाइक
  5. मुसड़ - धान कुटे खा लाइक

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