अर्थव्यवस्था: बैगा समाज कर आदमीन मेहनत करनवारे होथैं। इन अधिकतर डोंगर लिघ्घा रथैं एखरसेति इंखर कमाई डोंगर ले जादा होथै। पेहली कर बैगा आदमीन बोआर खेती करके कोदो, कुटक़ी बोवैं। अउर इन चीज बडे आदमीन जादा बोवैं। पर गऱीब आदमीन डोंगर कर साग खावैं। पर आजकाल कर बैगा धान घला कमा लेथैं। तबले घला बैगा समाज डोंगरेच कर साग जादा खाथैं अउर डोंगर कर चीज ले बेच के पैसा कमाथैं। जसे:-
- पिहऱी
- कऱील
- पुटपुड़ा
- बांस
- लकड़ी
- चार
- लाख
- कोसुम गोटी आदि
समान: बैगा समाज अपन रोज दिन कर काम ले करेके लाइक रदा चीज कर उपयोग करथैं। बैगा समाज कर अपन पारम्परिक चीज आहय पर आजकाल बैगा समाज कर लिघ्घा इन चीज देखेले नै मिलै। कुछ चीज कर नांव हई आय-
- कुमनी: मछड़ी बझायके लाइक
- कांवड़- पानी डोहारे खा लाइक
- चोल्ग़ी- महु बीने खा लाइक
- मंढ़ा - पैरा टांगे खा लाइक
- मुसड़ - धान कुटे खा लाइक